Showing posts with label Hindi Poetries. Show all posts
Showing posts with label Hindi Poetries. Show all posts

Sunday, August 6, 2023

ग़ज़ल: "आवश्यकता क्या है!"

तलब है, तो सब्र की आवश्यकता क्या है!
दवा ए दर्द की आवश्यकता क्या है!

मयख़ाने में हैं, तो जी भरकर लीजिए,
इन छोटे पैमानों की आवश्यकता क्या है!

तबाह तो होना है मुक्कमल जहां को इक दिन,
फ़िक्रमंदी ए सितम की आवश्यकता क्या है!

जंग ए ज़िंदगी तो अनवरत है,
अंजाम की, इसके, आवश्यकता क्या है!

ज़मीं ओ आसमां, सारा जहां है हमारा,
दो गज़ के ठिकानों की आवश्यकता क्या है!

मैं मशग़ूल हूं, सफ़र ए ज़िंदगी मे,
दख़लअंदाजी की आवश्यकता क्या है!

मिजाज मिरा, तो यूं भी बदनाम है,
बेवजह ग़फ़लतों की आवश्यकता क्या है!

किस क़दर खुला हूं मैं, जरा आकर तो देखिए,
चिलमनों से झांकने की आवश्यकता क्या है!

आसमां भी होगा, बुलंदियां भी होंगी,
पंख फड़फड़ाने की आवश्यकता क्या है!

अजी.., कुछ तो सब्र कीजिए जनाब,
इस जल्दबाज़ी की आवश्यकता क्या है!

Sunday, September 18, 2022

बढ़ चलो अभी

न रुको अभी, न थको कभी,
बढ़ चलो अभी, है विजय तभी.
यूं सुस्त - हार जो बैठ गए,
कुछ हुआ न आज, न और कभी.

है लक्ष्य जो जीवन का रखा,
है पथ वो चुनौतियों से भरा,
हों जितने भी रोध, पर डटा रह,
मत हार मान रुक जा तू कभी.

है आज गहन जो अंधियारा,
कल वहीं असीम उजियारा है.
है लक्ष्य गर लड़खड़ाया जो,
इसको संवार ले आज, अभी.

कितनी ही आंधियां तेज चलें,
जितनी भी धूप, या सर्द लगे,
न ढूंढ आशियां कोई अभी,
जब तक मिला जो ध्येय नहीं.

क्यूं है उदास, क्यों यूं निराश,
कर एक आस यही बार बार,
जो रात अमावस मेरे पथ में,
इक दिया अकेला जले कहीं.

दिन - रात एक बस बढ़ा ही चल,
हर कदम, जो लक्ष्य की ओर चले.
इक बार मान, ठान ले जो तू,
सबकुछ है पास, और यहीं.

वेलेंटाइन डे विशेष

क्या प्रेम के लिये कोई विशेष दिन, अथवा उत्सव होना चाहिये? निश्चित ही नहीं, यह तो शाश्वत है, जो किसी भी प्राचल (मानक) पर अनिर्भर है. पर यहां ...