न रुको अभी, न थको कभी,
बढ़ चलो अभी, है विजय तभी.
यूं सुस्त - हार जो बैठ गए,
कुछ हुआ न आज, न और कभी.
है लक्ष्य जो जीवन का रखा,
है पथ वो चुनौतियों से भरा,
हों जितने भी रोध, पर डटा रह,
मत हार मान रुक जा तू कभी.
है आज गहन जो अंधियारा,
कल वहीं असीम उजियारा है.
है लक्ष्य गर लड़खड़ाया जो,
इसको संवार ले आज, अभी.
कितनी ही आंधियां तेज चलें,
जितनी भी धूप, या सर्द लगे,
न ढूंढ आशियां कोई अभी,
जब तक मिला जो ध्येय नहीं.
क्यूं है उदास, क्यों यूं निराश,
कर एक आस यही बार बार,
जो रात अमावस मेरे पथ में,
इक दिया अकेला जले कहीं.
दिन - रात एक बस बढ़ा ही चल,
हर कदम, जो लक्ष्य की ओर चले.
इक बार मान, ठान ले जो तू,
सबकुछ है पास, और यहीं.
Unique dear
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